Best 166+ घर की जिम्मेदारी पर शायरी | Ghar ki jimmedari shayari 2 line

जिम्मेदारी सभी के ऊपर आती है किसी की जिंदगी में पहले आती है तो किसी की जिंदगी में बाद में आती है। बच्चों पर जिम्मेदारी आती है तो बच्चे भी जल्दी बड़े हो जाते हैं। घर के बड़े बेटे पर जिम्मेदारी सबसे पहले आती है। जिसकी जिंदगी में जिम्मेदारी नहीं है उसके लिए महान विद्वानों ने कहा है कि बहाने बनाना बंद कर दो जिम्मेदारी लेना शुरू कर दो। अगर आपकी जिंदगी में भी घर की जिम्मेदारी है तो आपका इस लेख में स्वागत है। इस लेख में हम आपके लिए Ghar ki Jimmedari Shayari लेकर आए है। घर की जिम्मेदारी उठाने वाले लोगों को यह शायरी लेख बहुत ज्यादा पसंद आने वाला है।

हमने इस लेख में घर की जिम्मेदारी पर शायरी लिखी है। आपकी जिंदगी में भी वाकई में घर की जिम्मेदारी है तो आपको यह शायरी लेख पढ़ कर मजा ही आ जाएगा। आपको यह लेख पढ़ना चाहिए इस लेख में आपको Ghar Ki Jimmedari Shayari boys, Jimmedari par Shayari on Life, लड़को की जिम्मेदारी पर शायरी आदि पढ़ने के लिए मिल जाएगी।

Ghar ki jimmedari shayari

जिम्मेदारी के बोझ ने कुछ ऐसे दिन भी दिखाए हैं,
सालों तक त्योहार मेरी माँ ने एक ही साड़ी में मनाए हैं….

Ghar ki jimmedari shayari

मजबूरियाँ देर रात तक जगाती है
साहेब और
जिम्मेदारियां सुबह जल्दी उठाती हे।

बहाने बनाना बद करो दो
जिम्मेदारी लेना शुरू करो।

जिम्मेदारियों का बोझ पीठ पर पसीना दे जाएगा,
दिल तुम्हारा कभी यू मचलेगा Jab बारिश में भीगने को….

ये जो जिम्मेदारियां हैं ना बड़ी बद्तमीज़ हैं,
ख़्वाहिशों को कैसे समझौतों में बदल देती हैं….

Ghar ki jimmedari shayari

जिम्मेदारी बढ़ने तो दो जनाब,
ख़्वाहिशें खुद बा खुद खुदकुशी कर लेंगी….

मैं मानता हूं कि जीवन जीना एक कला है पर
किसी के लिए जीना जीवन जीना उससे भी बड़ी कला है ।।।

Ghar ki jimmedari shayari

गर्मी बहुत थी दोस्तों अपने भी खून में,
पर घर की जिम्मेदारियों ने झुकना सिखा दिया

Ghar ki jimmedari shayari

सपनों को मार कर सच्चाई अपनानी पड़ी 😞
ज़िम्मेदारी ने नींद तक चुरानी पड़ी 🌙

छोटी उम्र में भी अपने ही पैरों पर खड़े हो जाते हैं,
ज़िम्मेदारियाँ हों सर पे तो बच्चे जल्द ही बड़े हो जाते हैं।

कंधों पर घर की जिम्मेदारी जब आती है
तो बचपन की वो मासूमियत कहीं पर खो जाती है !!

Ghar ki jimmedari shayari

जब सिर पर जिम्मेदारी का बोझ आता है
तब ही इंसान असली मर्द कहलाता है !!

ज़िन्दगी ने बहुत कौशीशें की मुझे रुलाने की,
मगर ऊपर वाले ने जिम्मेदारी उठा रखी है मुझे हँसाने की….

 

काम होता तो कब का ही ख़त्म हो चुका होता,
ये तो जिम्मेदारी ही है, जो हमेशा ही बढ़ती ही जा रही है….

 

कंधा झुका हुआ है मेरा, लेकिन मेरी उम्र बड़ी नहीं है..
आज समझ में आया, जिम्मेदारी से बड़ा कोई बोझ नहीं है….

Ghar ki jimmedari shayari

दिल कहता है मर जाऊँ तेरी जुदाई में,
पर जिम्मेदारियों ने मेरे हाथ जकड़ रखे हैं….

Ghar Ki Jimmedari Shayari 2 line

चिथड़े चिथड़े होकर रह गई सारी ख़्वाहिशें,
जिम्मेदारियों की ज़ोर आज़माईश के चलते….

Ghar ki jimmedari shayari

जबसे जिम्मेदारियों को मैंने अपना माना है,
मेरे कुछ शौक़ मुझे तो क़ातिल समझ कर बैठे हैं

 

समंदर से ख़ामोश रहकर उठाता हूँ जिम्मेदारी,
वरना शहर डुबोने का सलीका तो हम भी जानते हैं….

 

मोहब्बत करने वाले हज़ार मिल जायेंगे,
मानेंगे तब जब आप जिम्मेदारी निभाएंगे।

क्या बेचकर हम खरेदें तुझे ऐं ज़िन्दगी,
सब कुछ तो हमारा गिरवी पड़ा है जिम्मेदारी के बाज़ार में

Ghar ki jimmedari shayari

रातों को आंखों से नींद उड़ने लगी है
शायद अब जिम्मेदारियाँ बढ़ने लगी है !!

 

चाहतें सबकी हैं पर वक्त नहीं है अब किसी के भी पास ⏳
ज़िम्मेदारी ने बांध रखे हैं सारे साँस 🫁

इक उम्र ख्वाहिशों के लिए भी नसीब हो,
ये वाली तो बस…. जिम्मेदारियों में ही गुज़र गई….

कुछ इसलिए भी ख्वाईशो को मार देता हूँ
माँ कहती है घर की जिम्मेदारी है
तुझ पर।

Ghar Ki Jimmedari Shayari boys

तलाश है मुझे भी की कोई बातें इस दर्द बाटे मेरा,
मैं थक चुका हूं ,अब की उठा ले कोई
गोद में मुझे मैं मर चुका हूं ।।

Ghar ki jimmedari shayari

जिम्मेदारियां वह पिंजरा है जहां
इंसान आजाद होकर भी कैद है ।

कुछ इस लिए भी ख़्वाहिशों को मार देता हूँ,
माँ कहती है- घर की जिम्मेदारी है तुझपर….

थक कर रुक जाऊँ, ऐसा इरादा नहीं। 🙂
फ़र्ज़ से पीछे हटना, मुझे गवारा नहीं। 🚶‍♂️

जिम्मेदारियां के आगे कई बार
सपने हार जाते है।

उदा देती है नींदे कुछ जिम्मेदारियां घर की
रात में जगने वाला हर कोई शख्स
आशिक नहीं होता।

जो अपनी जिम्मेदारियां और फर्ज़ निभाता है
वो इंसान नहीं, मिसाल बन जाता है !!

 

अक्सर लोगों में तभी समझदारी आती है
जब कन्धों पर घर की ढेर सारी जिम्मेदारी आती है !!

Ghar ki jimmedari shayari

जब सर पर घर की ज़िम्मेदारी आती है
तब नींद Bhi अक्सर छुट्टी Par जाती है !!

Ghar ki jimmedari Shayari In Hindi 2 Line

अलार्म की जरूरत नहीं मुझे मैं अब सुबह उठ जाता हूँ
क्योंकि आजकल घर की जिम्मेदारियां उठाता हूँ !!

जब से सिर पर पारिवारिक ज़िम्मेदारी आई
मस्ती कम, समझदारी ज़्यादा नज़र आई !!

परिवार की हर खुशी में जो साथ निभाए
वो ही जिम्मेदारी का हक़दार कहलाए !!

जो अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाते हैं
वही असली हीरो कहलाते हैं !!

परिवार का सहारा बनना आसान नहीं होता
हर खुशी के पीछे कोई तो थका हुआ इंसान होता !!

जो अपने घर की जिम्मेदारी समझता है
वही दूसरों का दर्द भी महसूस करता है !!

 

अजीज दोस्तों को धीरे-धीरे भुलाने लगा हूँ
क्योंकि अब मैं अपने घर की जिम्मेदारी उठाने लगा हूँ !!

लड़को की जिम्मेदारी पर शायरी

विरासत में हमेशां जागीर और सोना चांदी
नहीं मिलते जनाब
कभी कभी जिम्मेदारियां भी मिल जाती है।

घर के उजाले का ज़िम्मा है मुझपर..
अब डगमगाने लगे चराग़, तो जलना पड़ रहा है मुझे….

ज़रूरतें, जिम्मेदारियां, ख़्वाहिशें..
यूँ ही इन तीन हिस्सों में पूरा दिन गुज़र जाता है….

जो खुद के लिए नहीं, अपनों के लिए जीते हैं। 🙂
वही ज़िम्मेदारी की असली मिसाल होते हैं। 🌿

चिथड़े चिथड़े होकर रह गई सारी ख़्वाहिशें,
जिम्मेदारियों की ज़ोर आज़माईश के चलते….

एक मल युद्ध चल रहा है मन मस्तिष्क में मेरे,
जिम्मेदारी ने धोबिपछाड़ दी है इच्छाओं को मेरे

Jimmedari Shayari 2 Line Hindi attitude

तुझे मिलेगा अब बस तेरे जैसा क्योंकि
मेरे इस जीवन में और भी घर की जिम्मेदारियां बहुत है ।।

इक उम्र ख्वाहिशों के लिए भी नसीब हो,
ये वाली तो बस…. जिम्मेदारियों में ही गुज़र गई….

जिम्मेदारी लेना मुसिबत
की बात नहीं
बल्कि आज़ादी की घोषणा है।

क्या बेचकर हम खरेदें तुझे ऐं ज़िन्दगी,
सब कुछ तो हमारा गिरवी पड़ा हुआ है इस जिम्मेदारी के बाज़ार में

जिम्मेदारियों से अब बदन टूटने सा लगा है,
क्यूँ न ख्वाहिशों की अंगड़ाई ली जाए….

तूफ़ान आए तो क्या, नाव हिम्मत से चलती है। 🙂
ज़िम्मेदारी मेरे लिए इम्तिहान नहीं, इबादत है। 🙏

रैक आपको विशेषाधिकार या
शक्ति नहीं देती
ये आपके ऊपर जिम्मेदारी डालती है

Jimmedari par Shayari on Life

दूनिया की सबसे बेहतर दवाई है
जिम्मेदारी
एक बार पि लीजिये साहब जिंदगी
भर थकने नहीं देगी।

छोटी उम्र में भी वो अपने पैरों पर खड़े हो जाते हैं,
ज़िम्मेदारियाँ हों उसके सर पे तो बच्चे बड़े होई जाते हैं।

खुद को खुश रखना ये आपकी
एक बहुत बड़ी

क्या खूब मज़बूरी हे गले में
लगे पेड़ो को
हरा भी रहना है और बढ़ना भी हे..

 

गरीबी पर शायरी
जिम्मेदारी चेहरे की रंगत बदल देती हे
शोक से तो कोई शख्स बुजा
नहीं रहता।

 

अपनी जिम्मेदारियां से भागने
वाला व्यक्ति कभी श्रेस्ठ
नहीं बन सकता।

 

शोहरत बेशक चुपचाप गुजर जाये
कमख्त बदनामी बड़ा
शोर मचाती है…

घर की जिम्मेदारी पर शायरी

छोटी भी है बड़ी भी है
ऐसी हज़ारो जिम्मेदारियां है
इसलिए तो हमें सिर्फ चाय से यारी है,

 

जिम्मेदारियों ने हमारी ख्वाहिशों के कान में ना जाने क्या ही फुसफुसाया,
कि ख्वाहिशें, झुर्रियां और जिम्मेदारियां जवाँ हो गयी….

मेरे शौक उस दिन से कम हो गए
जब से थोड़ा जिम्मेदार हम हो गए !!

जिम्मेदारियों को उठाने से क्यों
घभराते हो
जिंदगी में यही तो इंसान को
हुन्नरमंद बनाता है।

गर्मी बहुत थी दोस्तों अपने भी
खून में पर
घर की जिम्मेदारियों ने झुकना
सिखा दिया।

जश्न ए रोज़गार अभी तो ख़त्म भी नहीं हुआ था,
वज़्न-ए-जिम्मेदारी ने कंधा पकड़ लिया….

 

जिम्मेदारी बढ़ने तो दो जनाब,
ख़्वाहिशें खुद बा खुद खुदकुशी कर लेंगी….

Ghar ki Jimmedari Shayari in Hindi

जीवन बदलने वाली शायरी
बस मेरी ख़ुशीया में हिस्सेदारी
कर लेना तुम
सारे गमो की जिम्मेदारी में ले लूंगा।

 

जब जिम्मेदारियां कंधो पे आती है
तब पता चलता हे
जिन्दगी क्या चीज है।

 

जब जिम्मेदारियां बड़ी होती है
तब कोई काम छोटा या
बड़ा नहीं होता।

 

क्या बेचकर खरीदे फुरसत तुजसे
ए जिंदगी
सब कुछ तो गिरवी पड़ा है।

 

दुनिया वालो ने बहुत कोशिश की
हमें रुलाने की
मगर उपर वाले ने जिम्मेदारी उठा रखी है
हमें हँसा ने के लिए…..

 

ज़रूरतें, जिम्मेदारियां, ख़्वाहिशें..
यूँ ही तीन हिस्सों में हमारा सारा दिन ही गुज़र जाता है….

Ghar ki jimmedari in hindi

बड़ा बेटा है घर की शान 🌟
सपनों को सजाए अपनी जान 💫

 

सुबह-सुबह मैं जग नहीं पाता हूँ
जिम्मेदारियों से भग नहीं पाता हूँ !!

जिम्मेदारी निभाने का मज़ा तब आता है
जब दिल से किया काम असर दिखाता है !!

 

ये जो जिम्मेदारियां हैं ना बड़ी बद्तमीज़ हैं,
ख़्वाहिशों को कैसे समझौतों में बदल देती हैं….

 

एक मल युद्ध चल रहा है मन मस्तिष्क में मेरे,
जिम्मेदारी ने धोबिपछाड़ दी है इच्छाओं को मेरे

 

ये जो जिम्मेदारियां हैं ना बड़ी बद्तमीज़ हैं,
ख़्वाहिशों को कैसे समझौतों में बदल देती हैं….

 

एक मल युद्ध चल रहा है मन मस्तिष्क में मेरे,
जिम्मेदारी ने धोबिपछाड़ दी है इच्छाओं को मेरे

 

ज़रूरतें, जिम्मेदारियां, ख़्वाहिशें..
यूँ ही तीन अपना सारा हिस्सों में दिन गुज़र जाता है….

जिम्मेदारी उठाने वाला कभी हारता नहीं
क्योंकि वो दूसरों के लिए जीना जानता है !!

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जब लड़कों के कंधों पर जिम्मेदारी का बोझ आता है तो पता चलता है कि जिंदगी भी क्या चीज है। आपके कंधों पर भी जिम्मेदारी का बोझ होगा। आपके ऊपर भी आपके घर की जिम्मेदारी होगी। आपने इस लेख की घर की जिम्मेदारी पर शायरी तो पढ़ ली होगी। आप इस लेख की Ghar ki Jimmedari Shayari को अपने WhatsApp Status में लगा कर लोगो को यह बता सकते हो कि आपके ऊपर घर की जिम्मेदारी है। आपके शौक भी बड़े बड़े है पर घर की जिम्मेदारी ने आपको बांध रखा है।

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